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चीनी मंत्रियों से चुपके-चुपके क्यों मिले राहुल गांधी, भाजपा ने जताई चिंता

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शुक्रवार, 25 जनवरी 2019 (19:22 IST)
नई दिल्ली। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा उनकी कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल दरकिनार कर विदेश मंत्रालय एवं भारतीय दूतावास को दूर रख कर चीन के मंत्रियों से हुई मुलाकात का खुलासा किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की और पूछा कि आखिर गांधी चीन के गुणगान में क्यों लगे हैं?
 
भाजपा प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राहुल गांधी की कैलास मानसरोवर यात्रा के समय भाजपा ने कुछ संदेह व्यक्त किया था जो आज स्वयं गांधी के मुख से सत्यापित हो गया है।
 
भाजपा ने कहा था कि चीन के राजदूत की ओर से विदेश मंत्रालय को एक पत्र आया था जिसमें सरकार से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर समारोह पूर्वक गांधी को चीन जाने के लिए विदाई देने और प्रोटोकॉल लाउंज के प्रयोग की अनुमति मांगी गई थी। विदेश मंत्रालय ने इसे ठुकरा दिया था क्योंकि प्रोटोकॉल लाउंज का प्रयोग व्यक्तिगत यात्राओं के लिए नहीं किया जाता है।
 
डॉ. पात्रा ने कहा कि भाजपा ने उस समय भी पूछा था कि राहुल गांधी ने क्या चीन के किन्ही मंत्रियों से भेंट की है लेकिन तब कांग्रेस ने कहा था कि यह गांधी की निजी यात्रा है और ऐसी कोई भेंट नहीं हुई थी। लेकिन आज गांधी के मुख से अनायास ही यह सत्य उजागर हो गया कि इस यात्रा के दौरान उनकी चीन के कुछ मंत्रियों से मुलाकात हुई थी।
 
उन्होंने कहा कि गांधी भारत की एक अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष हैं और सांसद हैं। उनके कथन से जाहिर हो गया है कि कैलास मानसरोवर की यात्रा एक बहाना थी और चीन के मंत्रियों से मुलाकात गांधी का मुख्य मकसद था।
 
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह देश के हितों के लिहाज से बेहद गंभीर बात है। गांधी को बताना चाहिए कि वह चीन के किन मंत्रियों से मिले और उनके साथ गांधी की क्या बात हुई तथा इस मुलाकात से विदेश मंत्रालय और बीजिंग में भारतीय दूतावास को अंधेरे में रखने का क्या कारण था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कुछ समय से भारत की उपलब्धियों के आलोचक बन गए हैं और चीन का प्रचार करने लगे हैं।
 
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से पूछा, 'चुपके चुपके चीन के नेताओं से मिलना, लौटने  के बाद देश की हर बात की बुराई करना और चीन की हर बात का गुणगान करने का क्या कारण है।'
 
उन्होंने कहा कि 2017 जून में भी डोकलाम विवाद के समय भी राहुल गांधी चीन के राजदूत से परिवार के साथ मिले थे जिस पर पहले कांग्रेस पार्टी खंडन करती रही लेकिन बाद में तस्वीरें सार्वजनिक होने पर उन्हें स्वीकारना पड़ा था। (वार्ता) 

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