Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

महापर्व सिंहस्थ क्यों मनाते हैं, जानें ज्योतिषीय तथ्य

Webdunia
कुंभ मेले के आयोजन के संदर्भ में पर्याप्त पौराणिक तथ्य प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार देवताओं और दानवों ने रत्नों की प्राप्ति हेतु समुद्र मंथन किया। इस उपक्रम में उन्होंने सुमेरु पर्वत को मथनी तथा शेषनाग को रज्जु बनाया। फलस्वरूप मंथन के उपरांत समु्द्र में से 14 रत्न निकले। इनमें से एक 'अमृतभरा कुंभ' भी था। उक्त घड़े (कुंभ) हेतु देवताओं और दानवों के मध्य छीना-झपटी हुई। 



 
सूर्य, चंद्र, बृहस्पति आदि ग्रहों के पास से होता हुआ अंतत: यह कुंभ इंद्र के पुत्र जयंत के हाथ पड़ा। वह इसे देवलोक में ले गया। अमृत पीकर देवता अमर हो गए। इस भाग-दौड़ में अमृत 4 स्थानों- ना‍सिक, उज्जैन, प्रयाग एवं हरिद्वार में छलका। अमृत के छलकने के कारण प्रत्येक 12 वर्ष उपरांत उक्त स्थानों पर कुंभ पर्व मनाया जाता है। उज्जैन के महाकुंभ को 'सिंहस्थ' भी कहते हैं। इसका धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से भी इसका विशिष्ट महत्व है। 


 
ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार ग्रहों की स्थिति एवं गति के आधार पर उक्त चारों स्थलों पर महाकुंभ निम्न योग के आधार पर मनाया जाता है- 
 
(अ) नासिक- नासिक के संबंध में विष्णु पुराण में कहा गया है-
 
कर्के गुरु स्तथा भानुश्चन्द्रश्चन्द्र क्षये तथा।
गोदावर्या तदा कुम्भो जायतेऽवनि मण्डले।।
 
(ब) उज्जैन- उज्जैन हेतु निम्न योग का वर्णन है-
 
मेषराशि गते सूर्ये सिंह राश्या बृहस्पति।
अवन्तिकायां भवे कुम्भ: सदा मुक्ति प्रदायक:।।
 
उज्जैन में स्नान का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इसमें सिंहस्थ गुरु तथा कुंभ दोनों पर्व मिलते हैं। उज्जैन के कुंभ पर्व में निम्नलिखित 10 योग मुख्‍य होते हैं- 
 
(1) वैशाख मास, (2) शुक्ल पक्ष, (3) पूर्णिमा, (4) मेष राशि पर सूर्य का होना, (5) सिंह राशि पर बृहस्पति का होना, (6) चंद्र का तुला राशि पर होना, (7) स्वाति नक्षत्र, (8) व्यतिपात योग, (9) सोमवार, (10) उज्जैन नगरी का पवित्र स्थल। ये योग प्रति 12वें वर्ष एक साथ आते हैं। 
 
(स) प्रयाग- प्रयाग में कुंभ पर्व का योग निम्नानुसार उल्लेखित है-
 
मकरे च दिनानाथे वृष राशि स्थिते गुरौ।
प्रयागे कुंभ योगो वै माघ मासे विधुक्षये।।
 
(द) हरिद्वार- हरिद्वार में कुंभ पर्व का योग निम्नानुसार उल्लेखित है- 
 
पद्मिनी नायकं मेघे कुंभ राशि गते गुरौ।
गंगा द्वारे भवेद्योग: कुंभनामा तदोत्तनम्।। 

सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

पढ़ाई में सफलता के दरवाजे खोल देगा ये रत्न, पहनने से पहले जानें ये जरूरी नियम

Yearly Horoscope 2025: नए वर्ष 2025 की सबसे शक्तिशाली राशि कौन सी है?

Astrology 2025: वर्ष 2025 में इन 4 राशियों का सितारा रहेगा बुलंदी पर, जानिए अचूक उपाय

बुध वृश्चिक में वक्री: 3 राशियों के बिगड़ जाएंगे आर्थिक हालात, नुकसान से बचकर रहें

ज्योतिष की नजर में क्यों है 2025 सबसे खतरनाक वर्ष?

सभी देखें

धर्म संसार

Weekly Horoscope: साप्ताहिक राशिफल 25 नवंबर से 1 दिसंबर 2024, जानें इस बार क्या है खास

Saptahik Panchang : नवंबर 2024 के अंतिम सप्ताह के शुभ मुहूर्त, जानें 25-01 दिसंबर 2024 तक

Aaj Ka Rashifal: 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें 24 नवंबर का राशिफल

24 नवंबर 2024 : आपका जन्मदिन

24 नवंबर 2024, रविवार के शुभ मुहूर्त

Show comments