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ओम बिड़ला : प्रोफाइल

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राजस्थान में 2 बार विधायक और 3 बार सांसद, वसुंधरा राजे की सरकार में संसदीय सचिव और अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके ओम बिड़ला को इस बार मोदी सरकार ने 17वीं लोकसभा में अध्यक्ष पद के लिए एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाया था, जिसमें वे निर्विरोध चुन लिए गए।

जीवन परिचय : ओम बिड़ला का जन्म 4 दिसंबर 1962 को राजस्‍थान के कोटा में हुआ। उनके पिता का नाम श्री श्रीकृष्‍ण बिड़ला, माता का नाम स्‍व. श्रीमती शकुंतला देवी और पत्‍नी का नाम डॉ. श्रीमती अमिता बिड़ला है। इनकी दो बेटे और दो बेटियां हैं।

शिक्षा : एम. कॉम. (राजकीय कॉमर्स कॉलेज कोटा और एमडीएस विश्‍वविद्यालय, अजमेर

करियर : ओम बिड़ला ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से विकलांग, कैंसर रोगियों और थैलेसेमिया रोगियों की मदद की है। उन्होंने हरियाली के लिए कोटा में लगभग एक लाख पेड़ लगाने के लिए एक प्रमुख 'ग्रीन कोटा वन अभियान' लांच किया।

बिड़ला ने नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की एक प्रमुख योजना तैयार कर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवाओं को बढ़ावा देने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया।

उन्‍होंने 15 हजार से अधिक सेवानिवृत्त अधिकारियों को सम्मानित करने के लिए कोटा और बुंदी में समारोह आयोजित किया, जो बेहद सफल रहा। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत दल का नेतृत्व किया और 15-16 अगस्त 2004 को कोटा शहर में बाढ़ पीड़ितों को आश्रय और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कीं।

राजनीतिक जीवन : बिरला के राजनीतिक जीवन की शुरुआत साल 1978 में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुमानपुरा, कोटा से हुई। वे यहां छात्रसंघ अध्यक्ष रहे।

छात्र राजनीति के बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा, कोटा के जिलाध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने लगातार 6 साल तक प्रदेशाध्यक्ष के पद पर कार्य किया।

बिड़ला अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वे राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ, नई दिल्ली के वाइस चेयरमैन भी रह चुके हैं। साथ ही वसुंधरा राजे की सरकार में संसदीय सचिव भी रहे।

ओम बिड़ला साल 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनाव में पहली बार सांसद बने। फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में वे दोबारा इसी सीट से सांसद चुने गए। इससे पहले 2003, 2008 और 2013 में कोटा से ही विधायक बने। इस तरह वे 2 बार विधायक और 3 बार सांसद रह चुके हैं।

साल 2014 में उन्हें सदस्य, याचिका समिति, सदस्य, ऊर्जा संबंधी स्थाई समिति और सदस्य, सलाहकार समिति, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के रूप में नियुक्त किया गया।

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