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किसान संगठनों ने दिए सरकार से बातचीत के संकेत, आज की बैठक में लेंगे फैसला

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शनिवार, 26 दिसंबर 2020 (00:01 IST)
नई दिल्ली/ चंडीगढ़। केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान यूनियनों ने बातचीत के लिए सरकार की नई पेशकश पर विचार के लिए शुक्रवार को बैठक की। संगठनों में से कुछ ने संकेत दिया कि वे मौजूदा गतिरोध का हल खोजने के लिए केंद्र के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला कर सकते हैं। यूनियनों ने कहा कि शनिवार को उनकी एक और बैठक होगी जिसमें ठहरी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए केंद्र के न्योते पर कोई औपचारिक फैसला किया जाएगा।
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केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि सरकार को उम्मीद है कि अगले दौर की बैठक 2-3 दिनों में हो सकती है। प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं में से एक ने नाम उजागर नहीं करने की इच्छा के साथ कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी की उनकी मांग बनी रहेगी।
 
उन्होंने कहा कि केंद्र के पत्र पर फैसला करने के लिए शनिवार को हमारी एक और बैठक होगी। उस बैठक में हम सरकार के साथ बातचीत फिर शुरू करने का फैसला कर सकते हैं क्योंकि उसके पिछले पत्रों से प्रतीत होता है कि वह अब तक हमारे मुद्दों को नहीं समझ पाया है।
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उन्होंने कहा कि सरकार के पत्रों में कोई प्रस्ताव नहीं है और यही वजह है कि किसान संगठन नए सिरे से बातचीत करने और उन्हें अपनी मांगों को समझाने का फैसला कर सकते हैं। एक अन्य नेता ने कहा कि एमएसपी को इन तीन कानूनों को वापस लेने की हमारी मांग से अलग नहीं किया जा सकता है। इन कानूनों में निजी मंडियों का जिक्र किया गया है। यह कौन सुनिश्चित करेगा कि हमारी फसल तय एमएसपी पर बेची जाए अगर यह नहीं है?'
 
कई किसान यूनियनों की शुक्रवार को बैठक हुई, लेकिन केंद्र के ताजा पत्र को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने विरोध कर रहे किसान यूनियनों को गुरुवार को एक पत्र लिखा और उन्हें नए सिरे से बातचीत के लिए आमंत्रित किया।
 
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने शुक्रवार को केंद्र से मांग की कि वह ट्रेनों की व्यवस्था करे जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों तक पहुंच सकें। समिति ने कहा कि वे सभी किसानों के टिकटों के खर्च का भुगतान करने के लिए तैयार हैं।
किसानों को बदनाम करना बंद करे : उधर चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों को बदनाम करना बंद करना चाहिए और अपने विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने के तरीकों पर उनसे बातचीत करनी चाहिए।
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शिअद अध्यक्ष ने यहां एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली की सीमाओं पर भयंकर ठंड में खुले में रह रहे किसानों की पीड़ा के प्रति 'कठोर और असंवेदनशील रवैया' अपनाया है। सुखबीर ने कहा कि इससे ऐसा लगता है कि सरकार तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने वाले किसानों को दंडित करना चाहती है। यही कारण है कि केंद्र ने ऐसी नीति अपनाई है जिसका मकसद किसानों को थका देना है। (भाषा)

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